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शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला के रिज पर जाइका वानिकी परियोजना से जुड़े स्वयं सहायता समूहों के पारंपरिक, प्राकृतिक एवं रसायन मुक्त उत्पाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां पहुंचे सैलानियों की पहली पसंद बन गई। वन्यप्राणी सप्ताह के अंतिम दिन यानी वीरवार को रिज पर वन मंडल किन्नौर, बंजार, शिमला, रोहड़ू और चौपाल के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री एवं प्रदर्शनी के लिए स्टॉल लगाए गए।  प्रधान सचिव वन, एम सुधा देवी ने सभी स्टॉल का मुआयना किया। उन्होंने कहा कि जाइका वानिकी परियोजना से जुड़े स्वयं सहायता समूह बेहतरीन उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका में सुधार कर रहे हैं। उन्होंने लाहौल और किन्नौर जैसे दूरदराज क्षेत्रों से पहुंची महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों की महिलाएं रसायन मुक्त उत्पादों की बिक्री कर अपनी आर्थिकी में सुधार कर रही हैं।

एम, सुधा देवी ने कहा कि लाहौल का छरमा और किन्नौर के पारंपरिक वस्त्र, देसी घी, लोकल शहद, आचार, किन्नौरी राजमाह, लाल चावल, कोदे का आटा, गर्म जुराबें, पाइल नीडल प्रोडक्ट्स, सीरा-बड़ी आदि रसायन मुक्त उत्पादों की मांग बढ़ रही है। बता दें कि बाजार से सस्ते दाम और रसायन मुक्त उत्पादों की खरीददारी के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ सैलानियों की खूब भीड़ उमड़ी रही।इस अवसर पर वन बल प्रमुख एवं सीपीडी जाइका डा. संजय सूद, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ आलोक प्रेम नागर, वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी एवं सलाहकार स्वास्थ्य हिमाचल सरकार अनु नागर, सीसीएफ के. थिरूमल, सीएफ वाइल्ड लाइफ प्रिति भंडारी, परियोजना निदेशक जाइका एवं डीसीएफ शिमला अनिकेत एम. वानवे, डीसीएफ वाइल्ड लाइफ शेहनवाज भट्ट, डीएफओ पब्लिसिटी सरोज वर्मा, डीएफओ हेड क्वार्टर अनिता भारद्वाज, दिनेश पॉल, रेणु सेहजल, एसीएफ वाइल्ड लाइफ विनोद रंटा समेत वन विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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