शिमला। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने पेंशनरों के मुद्दों के साथ संगठन के अंदर चल रहे विवाद को लेकर भी मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में उन्होंने एक स्वयंभू नेता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह सरकार की कठपुतली बनकर पेंशनरों को गुमराह कर रहे हैं और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े मामलों में तथ्यों को सही तरीके से सामने नहीं रखा जा रहा।
वर्मा ने सुरेश ठाकुर की सदस्यता समाप्त किए जाने के विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में डिप्टी रजिस्ट्रार सहकारी समितियां के समक्ष मामला पहुंचा था। उन्होंने दावा किया कि 28 सितंबर 2026 के आदेश में सुरेश ठाकुर की सदस्यता से जुड़े पक्ष को सही पाया गया था। इसके बावजूद हाल में हुई प्रेस वार्ता में इन तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया। वर्मा ने 3 अक्तूबर के आदेश को भी चुनौती देने की बात कही और कहा कि प्रथम अपीलीय प्राधिकारी एवं सचिव सहकारिता के समक्ष अपील की जाएगी।
साढ़े पांच लाख के खाते पर भी विवाद
भूपराम वर्मा ने पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन के हिमाचल प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक की माल शाखा स्थित खाते में जमा करीब साढ़े पांच लाख रुपये को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वयंभू नेता इस खाते को संचालित करने की जल्दबाजी में हैं। वर्मा ने बताया कि बैंक प्रबंधन को पत्र भेजकर मामला विचाराधीन होने तक खाते के संचालन की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया गया है।
गांव-गांव पहुंचा रहे पेंशनरों के हक की आवाज
वर्मा ने बताया कि 18 सितंबर को बिलासपुर में 18 संगठनों की बैठक में प्रदेशभर में जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया था। समिति किन्नौर, काजा, रामपुर बुशहर, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, छौवारा और डोडरा-क्वार के बाद शिमला पहुंची है। पंचायत और गांव स्तर पर समितियां गठित कर सदस्यता अभियान भी चलाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार के पास 17 सूत्रीय मांगपत्र लंबित है। 15 प्रतिशत महंगाई राहत और छठे वेतन आयोग से जुड़ी देनदारियों का भुगतान भी लंबित है। सरकार ने 18 संगठनों की समिति को अभी तक वार्ता के लिए नहीं बुलाया है। वर्मा ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द वार्ता और कार्रवाई नहीं हुई तो पेंशनरों का आंदोलन और तेज किया जाएगा।
