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शिमला। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं ठियोग विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने सेब के लिए मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत मिलने वाले समर्थन मूल्य को 12 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 20 रुपये प्रति किलो करने की मांग प्रदेश सरकार से की है। उन्होंने कहा कि मौसम की मार के साथ बागवानों को बढ़ती मजदूरी, खाद, उर्वरक और कवकनाशी-कीटनाशक की लागत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मौजूदा एमआईएस दर बागवानों के लिए पर्याप्त नहीं है। राठौर ने कहा कि इस वर्ष भी फसल प्रभावित हुई है, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि विदेशों से सेब के आयात शुल्क में कमी का असर भी प्रदेश के बागवानों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, सरकार ने दूध, हल्दी, गेहूं, किन्नू और आम समेत कई कृषि उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं, लेकिन सेब के एमआईएस मूल्य में अभी तक बढ़ोतरी नहीं हुई है। राठौर ने बताया कि करीब 13-14 कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर सेब का एमआईएस मूल्य 12 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 20 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात कही है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी को इस संबंध में ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजने के निर्देश दिए हैं।

यूपीआई पर एमडीआर शुल्क को बताया उपभोक्ताओं पर बोझ
राठौर ने यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क बढ़ाने के फैसले का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल भुगतान का चलन लगातार बढ़ रहा है और लोग नकदी के बजाय यूपीआई को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका कहना है कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पहले ही आम लोगों पर टैक्स और अन्य शुल्कों का बोझ है। ऐसे में सरकार को उपभोक्ताओं के हित में इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

किशाऊ परियोजना से पर्यावरण और विस्थापन पर जताई चिंता:  राठौर
किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हुए एमओयू पर राठौर ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के फैसले को स्वागत योग्य बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना से हिमाचल को 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ होने की बात सामने आई है। हालांकि, उन्होंने परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव, जलवायु परिवर्तन और विस्थापन की चिंताओं को भी गंभीरता से लेने की जरूरत बताई। राठौर ने पोंग बांध का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विस्थापित हुए लोग आज भी अपने अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पर्यावरणीय बदलाव और आपदा की घटनाओं को देखते हुए बड़े बांधों और सुरंगों के पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों को परियोजना से लाभ मिलेगा, उनके हितों के साथ हिमाचल पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को भी ध्यान में रखना होगा। राठौर ने कहा कि हिमाचल को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान राशि बंद कर दी गई है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि आपदा के बाद प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता भी हिमाचल को नहीं मिली।

By admin

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